ज्वार की रोटी या मक्के की: वजन को घटाने के लिए कौन सी?

healthier Indian staples

क्या आप चपाती खाये बिना नहीं रह पाते है? समय आ गया है सेहतमंद भारतीय आहार लेने का।

healthier Indian staples

वजन कम करने वाले अधिकतर लोंगो को यह कहा जाता है की कार्बोहायड्रेट के सभी स्त्रोतों जैसे चपाती और ब्रेड को नहीं खाये। जबकि बहुत से लोगों को यह मालूम नहीं होता है की भारतीय खाने में भी लो-कार्ब और चर्बी को घटाने वाले खाने की चीजें होती है जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं। इसका सबसे अच्छा उदहारण ज्वार और मक्का है जो की भारतीय पांरपरिक भोजन है। ज्वार और मक्के की रोटी – कौन से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं वजन घटाने में।

सुपरफूड की शक्ति अब आपके आहार में।

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अगर हम अपना वजन वाकई में कम करना चाहते है तो हमें सही मात्रा में अच्छे कार्ब को अपने डाइट प्लान में शामिल करना पड़ेगा। साबुत अनाज और आटा जैसे ज्वार, रागी, बाजरा और मक्का बहुत ही बेहतरीन कोटि के आहार है जो किसी लोग भी वजन के प्रति सजग होते है उनके लिए एक वरदान साबित हो सकते है। 

ज्वार के आटे के फ़ायदे

Benefits of having jowar ka atta

ज्वार एक तरह का मोटा अनाज है जिसमें कैंसर से लड़ने के बेहतरीन गुण होते है और सबसे ज्यादा फाइबर होता अन्य किसी मोटे अनाज में नहीं होता है। इसमें उपयोगी विटामिन्स और मिनरल्स होते है जिनमें आयरन, फोलेट, प्रोटीन और कैल्शियम खास है। इसके आटे में फाइबर का हाई कंसन्ट्रेट होता है जो पूर्ण संतुष्टि प्रदान करता है, जो आपको दिन भर की ऊर्जा देता है। जिसकी वजह से आप कुल कैलोरीज की कम खपत कर पाते है और अपने वजन कम करने के उदेश्य को आगे बढ़ा पाते है। 

इसमें मौजूद फोर्टीफाईड विटामिन आपकी कमर के घेरे को बढ़ने से रोकता है। ज्वार हमारे पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा होता है जो ख़राब हानिकारक विषैले तत्व और फ्री रेडिकल्स को हमारे शरीर से बाहर निकालता है। ये ग्लूटेन मुक्त होते है अतः वे लोग भी ज्वार का आनंद ले सकते है जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी या जो ग्लूटेन के प्रति इन्टॉलरेंट होते है या फिर ग्लूटेन युक्त अनाज को नहीं ले पाते है। कुछ शोध यह भी बताते है की नियमित ज्वार खाने से डायबिटीज होने का खतरा भी कम हो जाता है और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रण में रखती है।   

मक्के का आटा खाने के फ़ायदे

Benefits of eating Makke ka atta

मक्का जनसाधारण का सर्दियों का आहार है जोकि भारत के नॉर्थेर्न हिस्से में रहते है। यह स्वास्थ्य के बहुत ही सेहतमंद घटक है जिसे ठंडों में खाया जाता है। साथ ही यह गेहूँ का अच्छा विकल्प भी साबित होता है। ज्वार की रचना में और उसका स्वाद ही असल अंतर होता है जो इसे गेहूँ से अलग बनता है। मक्के के आटे में गेहूँ के आटे के मुकाबले कम कैलोरीज होती है। इसमें प्रोटीन और माड़ प्रचुर मात्रा में मिलता है।

मक्के में आयरन, फॉस्फोरस, जिंक और विभिन्न विटामिन्स पाए जाते है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स की अधिकता आखों के लिए अच्छे होती है। साथ ही कैंसर और एनिमिया से हमारा बचाव भी करता है। ज्वार के जैसे मक्का भी ग्लूटेन मुक्त होता है। इसमें मौजूद प्रतिरोधक माड़ नियंत्रित वजन को अच्छी तरह से बनाये रखने में मदद करता है। मक्के में जटिल कार्बोहाइड्रेट्स होते है जो ज्यादा समय लेते है टूटने में जिसकी वजह से हम को लम्बे समय तक भूख नहीं लगती है और संतुष्टि बनी रहती है। 

दोनों के बीच का अंतर

The difference between the two

पोषण के हिसाब से दोनों के आटे में मामूली अंतर होता है। 100 ग्राम ज्वार के आटे में 360 कैलोरी, 72 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स, बहुत कम चर्बी और 9.7 ग्राम फाइबर होते है। वही 100 ग्राम मक्के के आटा भी तक़रीबन उतनी ही कैलोरी देता है, यह 77 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स, 5 ग्राम नमक, 6.8 ग्राम प्रोटीन और 7 ग्राम आहार सम्बन्धी फाइबर होते है। 100 ग्राम मक्के का आटा रोज की सुझाई गयी जरुरत का 10-19% विटामिन-B, Thiamine और Folate प्रदान करता है। मक्के के आटे में वसा की मात्रा थोड़ी ज्यादा की तरफ होती है जो की कुल वसा का 3.9 ग्राम होता है। 

जमीनी स्तर

Bottom line

यहाँ पर यह ध्यान में रखना जरुरी है की दोनों अनाज और उनका आटा आपको बहुत ही अच्छी तरह से आपको अपने भोजन की अदला-बदली करने का मौका देते है और वजन कम करने में सहायक होते है। दोनों में असली अंतर वसा की मौजूदगी का है। वजन कम करने वाले लोगों को थोड़ी संयमित पद्द्ति को अपनाना पड़ेगा और सभी कार्बोहाइड्रेट्स युक्त अनाज को संतुलित मात्रा में लेना पड़ेगा। ज्वार का आटा यहाँ पर थोड़ा बहुत और मददगार साबित हो सकता है बनिस्पत मक्के के आटे के। 

आपको क्या करना चाहिए?

What should you have

मक्के का आटा आपके लिए नुकसानदेह बन सकता है यदि आप उसमें वसा वाली चीजों को बहुतायत में शामिल करते है तो। उदाहरण के लिए कुछ लोग मक्के की रोटी खाते समय उसमें मक्खन का बड़ा टुकड़ा या फिर बहुत अधिक घी डाल लेते है जो आगे चल कर हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अतः हमें दोनों तरह के आटे को संतुलित मात्रा में उपयोग में लाना चाहिए। पोषण सम्बन्धी विशेषज्ञ भी मल्टी-ग्रेन यानि एक से अधिक अनाज को एक निर्धारित अनुपात में मिलाकर खाने की सलाह देते है। 

स्त्रोत्र